डियर जडेजा, मांजरेकर अपना काम कर रहे हैं, तुम अपना कर लो


वर्ल्ड कप 2019. ऑस्ट्रेलिया ने सेमी फाइनल में एंट्री बहुत पहले ही ले ली थी. दूसरे नंबर पर इंडिया पहुंची. बांग्लादेश को हराकर. लेकिन यहां मैच की परफॉरमेंस, टीम कॉम्बिनेशन, पॉइंट्स टेबल वगैरह-वगैरह की बात नहीं होगी. यहां बात होगी एक ट्वीट की. रवीन्द्र जडेजा का ट्वीट. ये ट्वीट भेजा गया संजय मांजरेकर के नाम. ट्वीट को देखकर ज़ाहिर सी बात लग रही थी कि लिखने वाला अर्थात रवीन्द्र जडेजा काफ़ी गुस्से में थे. उन्होंने लिखा – “मैंने तुमसे दोगुने से ज़्यादा मैच खेले हैं. मैं अभी भी खेल रहा हूं. जिन्होंने जीवन में कुछ कमाया है, उनकी इज्ज़त करना सीखो. मैं तुम्हारी मौखिक दस्त से तंग आ गया हूं.” इसके बाद उन्होंने संजय मांजरेकर को मेंशन भी किया.

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हुआ ये था कि कुछ ही वक़्त पहले संजय मांजरेकर ने रवीन्द्र जडेजा के बारे में बात करते हुए कहा था, “मुझे आधे-अधूरे प्लेयर टीम में नहीं पसंद और इस वक़्त जडेजा वैसे ही एक खिलाड़ी हैं. टेस्ट मैचों में वो प्योर बॉलर हैं. लेकिन 50 ओवर के मैच में एक बैट्समैन और बॉलर देखना पसंद करूंगा.” रवीन्द्र जडेजा ने असल में मांजरेकर की इसी बात के जवाब में ही ये ट्वीट किया था.

अब आपको बता दिया जाए कि रवीन्द्र जडेजा इस वर्ल्ड कप में टीम इंडिया की उस टोली का हिस्सा हैं जो कि इंग्लैंड में मौजूद है. हालांकि उन्हें एक भी मैच में खेलने का मौका नहीं मिला है. रवीन्द्र जडेजा को सिर्फ़ फ़ील्डिंग में सब्स्टिट्यूट के तौर पर इस्तेमाल किया गया है. जडेजा ने मांजरेकर से कहा कि उनके हिस्से में मांजरेकर से दोगुने मैच हैं. ये भी देख लेते हैं. नम्बर्स की बात करेंगे तो जडेजा एकदम सही हैं. जडेजा ने 151 वन-डे इंटरनेशनल मैच खेले हैं. 2035 रन बनाए हैं और 174 विकेट्स लिए हैं. वहीं मांजरेकर ने 74 वन-डे मैचों में 1994 रन बनाए हैं और 1 विकेट लिया है.

लेकिन अब बात करते हैं कि जडेजा का काम क्या है? जडेजा को एक ऑल राउंडर की हैसियत से खिलाया जाता है. वो बॉलिंग ऑल राउंडर हैं. लेफ़्ट आर्म स्पिन और खब्बू बल्लेबाज़ी. ये खब्बू शब्द अब लुप्त होता जा रहा है. पहले अखबारों में दिख जाता था. अब नहीं दिखता. खैर, रवीन्द्र जडेजा. मूंछों पर ताव देने वाले रवीन्द्र जडेजा. 50 मारने पर तलवार की तरह बल्ला घुमाने वाले रवीन्द्र जडेजा. शेरों के पास जाकर सेल्फी लेने वाले रवीन्द्र जडेजा. जूतों पर राजपूत लिखने वाले रवीन्द्र जडेजा. गोली की तरह थ्रो मारने वाले रवीन्द्र जडेजा. अंटी लगाकर अपने थ्रो से स्टंप तोड़ देने वाले रवीन्द्र जडेजा. एक आदमी और कितनी कहानियां. इनके लिए अंग्रेज़ी का flamboyant शब्द काफ़ी इस्तेमाल किया जाता है. लेकिन मेरे लिए, और सिर्फ़ मेरे लिए ही नहीं, किसी भी क्रिकेट को पसंद करने वाले के लिए रवीन्द्र जडेजा की सिर्फ़ एक ही पहचान है – वो बॉलिंग ऑल राउंडर हैं. उनके बारे में बाकी सारी बातें हम इसीलिए जानते हैं क्यूंकि वो एक बॉलिंग ऑलराउंडर हैं. उन्हें इंडियन टीम में इसलिए लिया गया था क्यूंकि वो शानदार बैटिंग और बॉलिंग करते हैं. इसलिए नहीं लिया गया था क्यूंकि उनकी मूछें और दाढ़ी स्टाइलिश हैं. और ऐसे में जब जडेजा की बॉलिंग और बैटिंग में खामी दिखाई देगी तो हम उसे नोटिस करेंगे. क्यूंकि वही उनका काम है और उनके काम में हमें खामी दिखाई दी.

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मैच के दौरान ये खामियां या खूबियां हम तक कौन पहुंचाता है? वो जिसके हाथ में माइक होता है. जिसे हम कहते हैं कमेंटेटर. संजय मांजरेकर एक कमेंटेटर हैं. ये उनका काम है. उन्हें अपनी क्रिकेट की जानकारी और बोलने की कला की वजह से ही कमेंट्री पैनल में शामिल किया गया है और वो वर्ल्ड कप में कमेंट्री कर रहे हैं.

जडेजा को मांजरेकर की कही बातें बुरी लगीं. इतनी बुरी कि उनके कहे शब्दों को दस्त कह दिया. जडेजा ने साल 2017 के बाद से अब तक 14 इनिंग्स में बैटिंग की है और 186 रन बनाए हैं. उनका एवरेज है 16.90 का. उन्होंने इसी ड्यूरेशन में 25 मैच खेले हैं और 27 विकेट लिए हैं. बॉलिंग एवरेज है 43 का. कम्पेयर करने के लिए बता देता हूं कि चाहल का इसी ड्यूरेशन में एवरेज 26.9 और कुलदीप यादव का 23.59 का है. और यही वजह है कि रवीन्द्र जडेजा को प्लेइंग इलेवन में जगह नहीं मिली है. फ़िलहाल अगर उन्हें इस वर्ल्ड कप में जगह मिलेगी भी तो वो सिर्फ़ इस मुद्दे की वजह सेमिल सकती है क्यूंकि इंडिया के पार अभी बैटिंग लाइनअप में भसड़ कटी हुई है और हम लगातार बैटिंग में एक्सपेरिमेंट कर रहे हैं. जडेजा सिर्फ़ इस किल्लत के चलते मजबूरी में इंडिया का हिस्सा बन सकते हैं जिसका हो जाना भी मुश्किल ही लग रहा है. यानी प्राइमरी एक बॉलर होने वाले खिलाड़ी को उसकी बल्लेबाज़ी के चलते टीम में लिया जाए और वो अपनी कमियां दिखाए जाने पर अगले को ही कोसने लगे. ये तो बेहद बेसिर-पैर की बात होगी.

संजय मांजरेकर ने एक किताब लिखी थी. नाम था इमपरफ़ेक्ट. ये नाम इसलिए क्यूंकि संजय मांजरेकर अपनी खामियों से भरी बैटिंग टेक्नीक के बारे में पूरी तरह से वाकिफ़ थे. असल में उन्हें ये बात अपने पिता और शानदार बल्लेबाज़ विजय मांजरेकर से ही सुनने को मिल गई थी. संजय ने कभी भी अपनी बल्लेबाज़ी को लेकर कोई मुगालता नहीं पाला. अपनी किताब में उन्होंने अपने काम के बारे में कुछ लिखा. काम यानी कमेंट्री करना. उन्होंने जो लिखा, वो बताया जाना निहायती ज़रूरी है. क्यूंकि हम उस वक़्त में रह रहे हैं जहां एक बड़े ट्विटर अकाउंट से ऐसे ट्वीट भी आते हैं जो एक कमेंटेटर को ये बताते हैं कि उसे दूसरे देश के खिलाड़ियों की बड़ाई कम करनी चाहिये और अपने देश के खिलाड़ियों को तरज़ीह देनी चाहिये. मेरी नज़र में ये काफ़ी अन-फ़ेयर है लेकिन देश की टीम का कप्तान भी उस ट्वीट की हां में हां मिला देता है. संजय ने अपनी किताब में लिखा है,


“एक कमेंटेटर के तौर पर मुझे इस बात का अहसास हुआ कि भले ही आपने इंडिया की कप्तानी नहीं की या 100-150 टेस्ट नहीं खेले हों, अगर आपने अपने खेल को पूरी ईमानदारी के साथ खेला था तो ये आपका हक़ बनता है कि आप एक विशेषज्ञ की तरह उस खेल के बारे में बात कर सकें. इसीलिए मैं कभी भी इस खेल के महान चेहरों की आलोचना करने में नहीं झिझका. मुझे यकीन है कि वो सभी सोचते होंगे कि इस संजय मांजरेकर ने आखिर कितना क्रिकेट खेला है जो इसे किसी और के बारे में ऐसा कहने का हक़ मिल गया. लेकिन मुझे मालूम है कि जनता के सामने खेलने वाले के एक खिलाड़ी के बारे में अपनी राय सामने रखना मेरी जॉब है. मुझे इसी के लिए नियुक्त किया गया है. जो भी ये काम इस तरह से नहीं करता है, अपने एम्प्लॉयर और दर्शकों के साथ धोखेबाज़ी कर रहा है. ये वो काम नहीं है जहां आप अपने सब्जेक्ट के साथ दोस्ती का रिश्ता बना लें. यहां आपका काम है कि आपके सामने जो भी हो रहा है, देखने और सुनने वालों को आप उसके बारे में अपनी ईमानदार राय दें. और इसके साथ ही खिलाड़ी आपके बारे में जो भी कहें, आपको उससे प्रभावित नहीं होना है.”


ये कहना था संजय मांजरेकर का जो कि मिलता है उनकी आत्मकथा में. ये मज़ेदार है. असल में रवीन्द्र जडेजा ने जो भी ट्वीट किया, संजय मांजरेकर उसका जवाब सभी के सामने दिसंबर 2017 में ही रख चुके हैं. इसके आगे कुछ भी कहा जाए, कम ही होगा.

और ऐसा संजय मांजरेकर या रवीन्द्र जडेजा के केस में ही नहीं बल्कि हर उस खिलाड़ी या कमेंटेटर के बारे में लागू होता है जो कि बुरा परफॉर्म कर रहा है या किसी खिलाड़ी की आलोचना कर रहा है. एक खिलाड़ी का काम है खेलना. उस लेवल का खेलना जो कि उससे एक्स्पेक्ट किया जाता है, जिसके लिए उसे टीम में रखा गया है. एक कमेंटेटर का काम होता है कि वो खेल के बारे में अपनी ईमानदार राय सामने रखे. ये उसका काम होता है. किसी खिलाड़ी को अपनी आलोचना नहीं सहन हो रही है तो उसका जवाब मोबाइल पर उंगलियां पीट कर नहीं बल्कि बाले से गेंद को पीट कर दे. क्रिकेट में फ्रेज़ है – Let your bat do the talking. मांजरेकर को अगर लगता है कि रवीन्द्र जडेजा bits and pieces क्रिकेटर हैं तो उन्हें ये कहने से कोई रोक नहीं सकता. म्यूट की हुई टीवी की तस्वीरें भी नहीं. कोई भी हैशटैग भी नहीं. अगर आप मांजरेकर से इसलिए नफ़रत करते हैं कि उनकी अपनी एक ओपिनियन है और वो आपकी ओपिनियन से मैच नहीं खाती तो आप निरे बेवकूफ़ हैं और कुछ भी नहीं. क्यूंकि यहां कोई भी अनटचेबल नहीं है. अंटी लगाकर सटीक थ्रो फ़ेंकने वाला भी नहीं. तलवार की तरह बल्ला भांजने वाला भी नहीं और कोई bits and pieces क्रिकेटर भी नहीं.


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