अधिकारियों की मिलीभगत पाए जाने पर उनके खिलाफ होगी कड़ी कार्रवाई

Edited By: सुरिन्द्र सिंह सोनी,नालागढ़
अपडेटेड: 5 months ago IST
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अवैध निर्माण को लेकर हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय लगातार शक्ति बनाए हुए हैं और अधिकारियों की मिलीभगत पाए जाने पर उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने का आदेश लगातार दिए जा रहे हैं  ठीक ऐसा ही मामला नालागढ़ की मेहता कॉलोनी को लेकर पाया गया है मेहता कॉलोनी के निवासी गुरमीत सिंह ने हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट में जनहित याचिका के दव  अवैध निर्माण को लेकर आवाज उठाई थी उन्होंने याचिका में लिखा था कि BJP वरिष्ठ कार्यकारिणी सदस्य ने अधिकारियों के हिसाब साठगांठ करके कलोनी की Park School Street की जमीन  42 दुकानों का निर्माण कर नगर परिषद के अधिकारियों के साथ मिलकर नक्शा पास करवा कर लोगों को बहकाकर बेच दिया है 
इस अवैध निर्माण में पटवारी से लेकर तहसीलदार क्लर्क ब टीसीपी के अधिकारियों की मिलीभगत होने का भी आरोप लगाया गया है गुरमीत का कहना है कि जब कॉलोनी के लिए पारक की भूमि व स्कूल की भूमि का नक्शा पहले ही किसी भी विभाग से पास करवाया जा चुका है तो उसमें दोबारा कैसे 42 दुकानों को पास करवाया
 
 जनहित याचिका के द्वारा अवैध निर्माण सामने आने पर हाईकोर्ट ने संबंधित विभागों को बयान शपथ पत्र के माध्यम से अपने-अपने जवाब दायर करने के लिए कहा था जिसमें बीबीएनडीए अधिकारी के.सी. चमन ने बताया की अवैध निर्माण की जांच वर्ष 2014 में एसआईटी के द्वारा की जा चुकी है जिसमें पाया गया है कि यहां अवैध निर्माण किया गया है और जो यह पीआईएल दायर की गई है वह बिल्कुल सच्ची है उच्च न्यायालय में संबंधित विभागों के शपथ पत्र आने के बाद न्यायाधीश ने आदेश दिए हैं अवैध निर्माण के खिलाफ उचित कानूनी कार्यवाही जल्द से जल्द अमल में लाई जाए
 
जनहित याचिका में भाजपा के वरिष्ठ कार्यकारिणी सदस्य का नाम आने के बाद आने वाले लोकसभा चुनावों में भारतीय जनता पार्टी को इसका नुकसान भी देखने को मिल सकता है क्योंकि अवैध निर्माण में बनी 40 दुकाने में ज्यादातर नालागढ़ के रहने वाले लोगों को ही यह दुकान में बेची गई है और भारी मात्रा में पैसे वसूल किए गए हैं गुरमीत सिंह का कहना है एक दुकान की कीमत 12,00000 से लेकर 20,00000 तक बेची गई है

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